कुरान - 15:2 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
رُّبَمَا يَوَدُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَوۡ كَانُواْ مُسۡلِمِينَ

Transliteration: (Rubamaa yawaddul lazeena kafaroo law kaanoo muslimeen)

बहुत बार काफ़िर तमन्ना करेंगे [2] कि काश वे मुसलमान होते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 2 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

बहुत बार काफ़िर तमन्ना करेंगे [2] कि काश वे मुसलमान होते।

[2] काफ़िरों की तमन्ना और पछतावा

काफ़िर मौत के वक़्त, फिर अपनी क़ब्रों में अज़ाब के फ़रिश्तों को देखकर, और उसके बाद क़यामत के दिन यह तमन्ना करेंगे; लेकिन उस वक़्त उनकी यह हसरत और आरज़ू बेफ़ायदा होगी। यहाँ लफ़्ज़ 'काफ़िर' से तमाम क़िस्म के मुनकिर मुराद हैं — चाहे वे मुश्रिक हों, यहूदी, ईसाई हों, या मिर्ज़ाई व क़ादियानी वग़ैरा हों।

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