कुरान - 3:100 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ إِن تُطِيعُواْ فَرِيقٗا مِّنَ ٱلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ يَرُدُّوكُم بَعۡدَ إِيمَٰنِكُمۡ كَٰفِرِينَ

Transliteration: (Yaaa ayyuhal lazeena aamanoo in tutee'oo fareeqam minal lazeena ootul Kitaaba yaruddookum ba'da eemaanikum kaafireen)

ऐ ईमान वालो! अगर तुम अहले किताब के किसी गिरोह का कहना मानोगे, तो वे तुम्हें तुम्हारे ईमान लाने के बाद फिर काफ़िर बना देंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 100 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 100

✅ अहले किताब की पैरवी से परहेज़

अंसार (औस और ख़ज़रज) के दरमियान यहूदियों ने पुरानी दुश्मनी भड़काने की साज़िश की थी। इस आयत ने मुसलमानों को ख़बरदार किया कि अहले किताब की बातों में न आएं।

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