कुरान - 3:98 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

98
قُلۡ يَـٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ لِمَ تَكۡفُرُونَ بِـَٔايَٰتِ ٱللَّهِ وَٱللَّهُ شَهِيدٌ عَلَىٰ مَا تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Qul yaaa Ahlal Kitaabi lima takfuroona bi Aayaatillaahi wallaahu shaheedun 'alaa maa ta'maloon)

कह दीजिए: 'ऐ अहले किताब! तुम अल्लाह की आयतों का क्यों इनकार करते हो, हालांकि जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उस पर गवाह है?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 98 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 98

✅ अहले किताब की सरकशी पर मलामत

यहूद व नसारा अपनी किताबों में हुज़ूर (सल्ल.) की बशारतें मौजूद होने के बावजूद हक़ का इनकार करते थे, जिस पर उन्हें झकझोरा गया।

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