कुरान - 3:99 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

99
قُلۡ يَـٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ لِمَ تَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ مَنۡ ءَامَنَ تَبۡغُونَهَا عِوَجٗا وَأَنتُمۡ شُهَدَآءُۗ وَمَا ٱللَّهُ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Qul yaaa Ahlal Kitaabi lima tusuddoona 'an sabeelil laahi man aamana tabghoonahaa 'iwajanw wa antum shuhadaaa'; wa mallaahu bighaafilin 'ammaa ta'maloon)

कह दीजिए: 'ऐ अहले किताब! तुम ईमान लाने वालों को अल्लाह की राह से क्यों रोकते हो, तुम उसमें टेढ़ तलाश करते हो हालांकि तुम ख़ुद गवाह हो? और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उससे ग़ाफ़िल नहीं है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 99 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 99

✅ राहे हक़ से रोकने की साज़िश

यहूदी मुसलमानों को बहकाने और इस्लाम में ख़ामियां तलाश करने की साज़िशें करते थे, जिसे अल्लाह ने बे-नक़ाब फ़रमाया।

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