कुरान - 3:171 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

171
۞يَسۡتَبۡشِرُونَ بِنِعۡمَةٖ مِّنَ ٱللَّهِ وَفَضۡلٖ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجۡرَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Yastabshiroona bini'matim minal laahi wa fad linw wa annal laaha laa yudee'u ajral mu'mineen)

वे उस इनाम पर खुश हैं जो उन्हें अल्लाह की नेमतों में से मिला है [389], और अल्लाह मुसलमानों के सवाब को ज़ाया नहीं करता [390]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 171 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 171 की तफ़्सीर

 

✅ [389] शहीदों को मिलने वाला बुलंद इनाम

इस आयत में बताया गया है कि शहीद अल्लाह की दी हुई नेमतों पर खुश होते हैं। इससे कई महत्वपूर्ण बातें मालूम होती हैं:

  • काफ़िरों के अच्छे काम भी आख़िरकार बेकार हो जाते हैं, क्योंकि ईमान के बिना कोई भी अमल अल्लाह के यहाँ क़बूल नहीं होता।
  • शहीदों का इनाम सबसे बड़ा और मुकम्मल होता है, क्योंकि जहां आम लोग माल, वक़्त या मेहनत कुर्बान करते हैं, वहीं शहीद अपनी जान तक कुर्बान कर देते हैं — जो सबसे बड़ी कुर्बानी है।
  • इसलिए उनका सवाब हर लिहाज़ से मुकम्मल और बेहद अज़ीम होता है।
  • अल्लाह किसी सच्चे मोमिन की मेहनत को ज़ाया नहीं करता, चाहे वह छोटी हो या बड़ी।
  • एक सच्चा मोमिन मुक़द्दस चीज़ों की ताज़ीम करता है, ख़ासकर रसूलुल्लाह ﷺ की शान का अदब करता है।
  • यह भी याद रहे कि रसूल ﷺ की बेअदबी कुफ़्र है, और जो भी ऐसा करे, उसके सारे अच्छे काम नष्ट हो जाते हैं।
  • काफ़िरों ने जब रसूल ﷺ की आवाज़ से ऊँची आवाज़ उठाई, तो उनके सारे आमाल माटी हो गए — यह अल्लाह की किताब में दर्ज है।

✅ [390] मोमिनों को सवाब देने में अल्लाह की अद्ल

इस भाग में अल्लाह फ़रमा रहा है कि वह मुसलमानों के सवाब को ज़ाया नहीं करता — इससे अल्लाह की इंसाफ़पसंदी और इनआमात की झलक मिलती है। यह उन सब के लिए तसल्ली है जो इख़लास और सब्र से मेहनत करते हैं — ख़ासकर जान की कुर्बानी देने वाले शहीद। अल्लाह तआला हर कुर्बानी को क़ुबूल करता है, और उसका सिला ज़रूर अता करता है, चाहे दुनिया में हो या आख़िरत में।

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