कुरान - 3:188 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

188
لَا تَحۡسَبَنَّ ٱلَّذِينَ يَفۡرَحُونَ بِمَآ أَتَواْ وَّيُحِبُّونَ أَن يُحۡمَدُواْ بِمَا لَمۡ يَفۡعَلُواْ فَلَا تَحۡسَبَنَّهُم بِمَفَازَةٖ مِّنَ ٱلۡعَذَابِۖ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ

Transliteration: (Laa tahsabannal lazeena yafrahoona bimaaa ataw wa yuhibbona ai yuhmadoo bimaa lam yaf'aloo falaa tahsabannahum bimafaazatim minal 'azaabi wa lahum 'azaabun aleem)

कभी उनको न समझो कि जो अपने किए पर प्रसन्न होते हैं और चाहते हैं कि उन्हें उसकी प्रशंसा भी दी जाए जो उन्होंने किया ही नहीं [430], उनको सज़ा से बचा हुआ मत समझो; और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है [431]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 188 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 188 की तफ़्सीर

 

✅ [430] झूठे घमंड और नाजायज़ प्रशंसा पर चेतावनी

इस आयत में उन लोगों की निंदा की गई है जो ऐसे कार्यों पर इतराते हैं जो वास्तव में उन्होंने किए ही नहीं, और फिर भी वे चाहते हैं कि लोग उनकी प्रशंसा करें। इससे यह सीख मिलती है:
किसी कायर को बहादुर कहना या किसी जाहिल को "शम्सुल उलमा" जैसे ऊँचे खिताब देना धोखेबाज़ी है, और यह ग़ैर-मुस्लिमों के आचरण से मिलता-जुलता है।
इसी तरह, जब कोई अज्ञानी खुद को आलिम समझने लगे या धोखे से धार्मिक उपाधियाँ हासिल करे—यह भी एक भयावह बीमारी है जो आज भी आम है।
इस आयत में ऐसे सभी लोगों की भर्त्सना की गई है—चाहे वे झूठी प्रशंसा पाने वाले हों या वो जो झूठी प्रशंसा करते हैं।

✅ [431] गुमराही फैलाने वालों के लिए सख़्त चेतावनी

यह हिस्सा उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो जानबूझकर लोगों को गुमराह करते हैं, और सत्य को छिपाकर, लोगों को अज्ञान में रखकर, अपनी शोहरत या स्वार्थ के लिए इसका फायदा उठाते हैं।
ऐसे लोग अल्लाह की सज़ा से बिलकुल भी सुरक्षित नहीं हैं।
बल्कि उनके लिए एक दर्दनाक अज़ाब तय है—इसलिए नहीं कि उन्होंने सिर्फ धोखा दिया, बल्कि इसलिए कि उन्होंने दूसरों को जान-बूझकर भटकाया।

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