“और रहे वो लोग जिन्होंने इनकार किया, तो मैं उन्हें दुनिया और आख़िरत में सख़्त सज़ा दूँगा [123], और उनके लिए कोई मददगार न होगा [124]।”
अल्लाह तआला इनकार करने वालों को दोनों जहानों में सज़ा देगा:
कोई मददगार न होना भी अल्लाह की तरफ़ से एक किस्म की सज़ा और ज़िल्लत है।
जैसा कि क़ुरआन में है:
“बेशक, अल्लाह तुम्हारा मददगार है और उसका रसूल और ईमान वाले।” (सूरह अल-माइदा, 5:55)
इसलिए, जो कहे कि मेरे लिए कोई मददगार नहीं, वह या तो कुफ्र में है, या ईमान से महरूम है।
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सूरह आल-इमरान आयत 56 तफ़सीर