कुरान - 3:58 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
ذَٰلِكَ نَتۡلُوهُ عَلَيۡكَ مِنَ ٱلۡأٓيَٰتِ وَٱلذِّكۡرِ ٱلۡحَكِيمِ

Transliteration: (Zaalika natloohu 'alaika minal Aayaati wa Zikril Hakeem)

“यह वही आयतें हैं जो हम तुम्हें सुनाते हैं [127] — हिकमत भरा पैग़ाम।” (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले-इमरान – आयत 58 की तफ़्सीर

 

✅ [127] नेक बंदों के काम को अल्लाह अपनी तरफ़ मंसूब करता है

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है: “हम तुम्हें सुनाते हैं”,
जबकि वास्तव में कुरआन की तिलावत हज़रत जिबरील (अ.स) के ज़रिए होती थी।

🔹 इसका मतलब यह है कि:

  • अल्लाह अपने हुक्म से होने वाले कामों को अपनी तरफ़ मंसूब करता है, चाहे वो किसी फ़रिश्ते या नबी के ज़रिए हों।
  • जैसे हज़रत ईसा (अ.स) ने कहा: “मैं मुर्दों को ज़िंदा करूंगा,”
  • या जिबरील (अ.स) ने कहा: “मैं तुम्हें पाक बेटा दूंगा” — ये सब अल्लाह के हुक्म से होता है।

☝️ इसका मक़सद यह दिखाना है कि अल्लाह तआला अपने नेक और मुक़र्रब बंदों के ज़रिए अपने काम अंजाम देता है, और ये सब उसके हुक्म और इरादे के तहत होता है — किसी की ज़ाती ताक़त से नहीं।

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