“रहे वो लोग जो ईमान लाए और नेक अमल किए [125], तो अल्लाह उन्हें उनके इनाम पूरी तरह अता फरमाएगा [126], और अल्लाह ज़ालिमों को पसंद नहीं करता।”
यह आयत बताती है कि सिर्फ़ ईमान लाना ही काफ़ी नहीं, बल्कि उसके साथ नेक अमल करना भी अनिवार्य है।
अल्लाह तआला ईमान वालों को:
इस आयत में यह भी साबित होता है कि अल्लाह के इनाम मुकम्मल और इंसाफ़ पर आधारित होते हैं, और जो ज़ुल्म करते हैं, उन्हें अल्लाह बिल्कुल पसंद नहीं करता।
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सूरह आल-इमरान आयत 57 तफ़सीर