Transliteration: (Huwal lazee yusawwirukum fil arhaami kaifa yashaaa'; laa ilaaha illaa Huwal 'Azeezul Hakeem)
यह आयत बताती है कि भले ही गर्भ में शिशु की रचना में फरिश्ते नियत किए गए हों, लेकिन यह कार्य अंततः अल्लाह के आदेश से ही होता है। इसलिए, जब अल्लाह के चुने हुए सेवक उसके आदेशानुसार कुछ करते हैं, तो वह कार्य अल्लाह के कार्य माने जाते हैं। यह बात यह स्पष्ट करती है कि पृथ्वी और उसके सभी जीवों का रूप, आकार और निर्माण मनुष्य के प्रयासों से नहीं, बल्कि ईश्वरीय इरादे से निर्धारित होता है। हालांकि, यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर है: इस संसार में सभी सृजन केवल अल्लाह के निर्णय से होते हैं, जबकि परलोक में व्यक्ति की स्थिति उसके कर्मों से निर्धारित होगी।
🔸 जैसा कि अल्लाह ने कहा: "जिस दिन कुछ चेहरों पर उजाला होगा (प्रकाशित) और कुछ चेहरों पर अंधकार होगा" (सूरा आल-ए-इमरान, 3:106)। यह बात यह दर्शाती है कि इंसान के फैसले और कर्म ही उसकी निश्चित भविष्यवाणी करेंगे, भले ही उसका शारीरिक सृजन उसके नियंत्रण में न था।
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