कुरान - 17:100 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

100
قُل لَّوۡ أَنتُمۡ تَمۡلِكُونَ خَزَآئِنَ رَحۡمَةِ رَبِّيٓ إِذٗا لَّأَمۡسَكۡتُمۡ خَشۡيَةَ ٱلۡإِنفَاقِۚ وَكَانَ ٱلۡإِنسَٰنُ قَتُورٗا

Transliteration: (Qul law antum tamlikoona khazaaa'ina rahmati Rabbeee izal la amsaktum khash yatal infaaq; wa kaanal insaanu qatooraa (section 11))

कह दीजिए कि 'अगर तुम मेरे रब की रहमत के ख़ज़ानों के मालिक होते, तो भी तुम ख़र्च हो जाने के डर से उन्हें रोक रखते;' और इंसान बड़ा ही तंगदिल (कंजूस) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 100 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 100

✅ अल्लाह के बेपायां ख़ज़ाने और इंसान की तंगदिली

अल्लाह के ख़ज़ाने और रहमतें ला-महदूद हैं और कभी ख़त्म नहीं होतीं। अगर अल्लाह दुनियावी ख़ज़ानों की कुंजियाँ इन नाशुकरे इंसानों के हाथ में दे देता, तो वे इस डर से दूसरों को एक क़तरा भी न देते कि कहीं ख़ज़ाना ख़त्म न हो जाए। इंसान फ़ितरतन बेहद तंगदिल और कंजूस है, सिवाय उनके जिन्हें अल्लाह ईमान से नवाज़े।

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