कुरान - 17:99 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

99
۞أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّ ٱللَّهَ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ قَادِرٌ عَلَىٰٓ أَن يَخۡلُقَ مِثۡلَهُمۡ وَجَعَلَ لَهُمۡ أَجَلٗا لَّا رَيۡبَ فِيهِ فَأَبَى ٱلظَّـٰلِمُونَ إِلَّا كُفُورٗا

Transliteration: (Awalam yaraw annal laahal lazee khalaqas samaawaati wal arda qaadirun 'alaaa any yakhluqa mislahum wa ja'ala lahum ajalal laa raiba fee; fa abaz zaalimoona illaa kufooraa)

क्या उन्होंने यह नहीं देखा कि जिस अल्लाह ने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया है, वह उन जैसों को दोबारा पैदा करने पर पूरी क़ुदरत रखता है? और उसने उनके लिए एक मुक़र्रर वक़्त (मौत व क़ियामत) तय कर रखा है जिसमें कोई शक नहीं; फिर भी ज़ालिमों ने सिवाय कुफ़्र के कुछ क़ुबूल न किया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 99 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 99

✅ कायनात की अज़ीम ख़िलक़त और दोबारा ज़िन्दगी की दलील

अल्लाह तआला दलील फ़रमाता है कि जिस ज़ात ने इतने वसीअ व अरीज़ आसमानों और ज़मीन को बगैर किसी सुतून के अदम से वजूद बख़्शा, क्या उसके लिए एक छोटे से इंसान को दोबारा ज़िन्दा करना मुश्किल है? क़ियामत का दिन तयशुदा है, लेकिन बेइंसाफ़ लोग हक़ीक़त से मुंह मोड़ते हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now