कुरान - 17:20 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
كُلّٗا نُّمِدُّ هَـٰٓؤُلَآءِ وَهَـٰٓؤُلَآءِ مِنۡ عَطَآءِ رَبِّكَۚ وَمَا كَانَ عَطَآءُ رَبِّكَ مَحۡظُورًا

Transliteration: (Kullan numiddu haaa 'ulaaa'i wa haaa'ulaaa'i min 'ataaa'i rabbik; wa maa kaana 'ataaa'u rabbika mahzooraa)

हम इन को और उन को, सब को आपके रब की अता (फ़ज़्ल) से मदद पहुँचाते हैं [53]। और आपके रब की अता किसी पर रुकी हुई नहीं है [54]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह बनी इस्राईल – आयत 20 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"हम इन को और उन को, सब को आपके रब की अता से मदद पहुँचाते हैं [53]। और आपके रब की अता किसी पर रुकी हुई नहीं है [54]।"

[53] दुनिया और आख़िरत दोनों के तालिबों को रिज़्क़ की अता

इसका मतलब यह है कि अल्लाह तआला ने इस दुनिया में दुनिया के तालिबों और आख़िरत के तालिबों दोनों के लिए असबाब और सामान मुहैया फ़रमा दिए हैं।

उन सब को अल्लाह के ख़ज़ाने से रिज़्क़ मिल रहा है। इस दुनिया में ज़हर भी मौजूद है और उसका तिर्याक़ (इलाज) भी, यहाँ शैतान भी है और सच्चे हादी व रहनुमा (अम्बिया व औलिया) भी।

[54] रब की दुनियावी अता हर एक के लिए आम है

यही वजह है कि दुनियावी नेमतें गुनहगार और परहेज़गार दोनों को मिलती हैं, और काफ़िर व मोमिन दोनों को अता होती हैं।

इससे हमें सबक़ मिलता है कि दुनिया और आख़िरत की नेमतें महज़ हमारी अपनी कोशिश का नतीजा नहीं हैं, बल्कि ख़ालिस अल्लाह तआला के फ़ज़्ल व करम से हासिल होती हैं।

लिहाज़ा किसी को अपनी दौलत या कामयाबी पर हरगिज़ घमंड नहीं करना चाहिए।

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