कुरान - 17:21 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
ٱنظُرۡ كَيۡفَ فَضَّلۡنَا بَعۡضَهُمۡ عَلَىٰ بَعۡضٖۚ وَلَلۡأٓخِرَةُ أَكۡبَرُ دَرَجَٰتٖ وَأَكۡبَرُ تَفۡضِيلٗا

Transliteration: (Unzur kaifa faddalnaa ba'dahum 'alaa ba'd; wa lal Aakhiratu akbaru darajaatinw wa akbaru tafdeelaa)

देखो, हमने कैसे उन में एक को दूसरे पर बड़ाई (फ़ज़ीलत) दी है; और बेशक आख़िरत दर्जों में सबसे बड़ी और फ़ज़ीलत में सबसे बढ़कर है [55]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह बनी इस्राईल – आयत 21 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"देखो, हमने कैसे उन में एक को दूसरे पर बड़ाई दी है; और बेशक आख़िरत दर्जों में सबसे बड़ी और फ़ज़ीलत में सबसे बढ़कर है [55]।"

[55] दुनिया पर आख़िरत के दर्जों की बरतरी

इसका मतलब यह है कि जिस तरह इस दुनिया में सब लोग बराबर नहीं हैं, उसी तरह आख़िरत में भी हर एक का मर्तबा और दर्जा अलग-अलग होगा।

चुनाँचे जो शख़्स आख़िरत में लोगों के मुख़्तलिफ़ दर्जों और मरातिब का इनकार करता है, वह हक़ीक़त में दुनिया को भी बसीरत की आँख से नहीं देख रहा है।

अम्बिया किराम के छोटे से छोटे अमल का सवाब भी हमारे सबसे बड़े अमल के सवाब से कहीं बढ़कर होगा।

हुज़ूर अकरम ﷺ के किसी सहाबी का सिर्फ़ एक सेर जौ सदक़ा करना हमारे पहाड़ बराबर सोना ख़ैरात करने से कहीं अफ़ज़ल और बढ़कर है।

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