Transliteration: (Unzur kaifa faddalnaa ba'dahum 'alaa ba'd; wa lal Aakhiratu akbaru darajaatinw wa akbaru tafdeelaa)
"देखो, हमने कैसे उन में एक को दूसरे पर बड़ाई दी है; और बेशक आख़िरत दर्जों में सबसे बड़ी और फ़ज़ीलत में सबसे बढ़कर है [55]।"
इसका मतलब यह है कि जिस तरह इस दुनिया में सब लोग बराबर नहीं हैं, उसी तरह आख़िरत में भी हर एक का मर्तबा और दर्जा अलग-अलग होगा।
चुनाँचे जो शख़्स आख़िरत में लोगों के मुख़्तलिफ़ दर्जों और मरातिब का इनकार करता है, वह हक़ीक़त में दुनिया को भी बसीरत की आँख से नहीं देख रहा है।
अम्बिया किराम के छोटे से छोटे अमल का सवाब भी हमारे सबसे बड़े अमल के सवाब से कहीं बढ़कर होगा।
हुज़ूर अकरम ﷺ के किसी सहाबी का सिर्फ़ एक सेर जौ सदक़ा करना हमारे पहाड़ बराबर सोना ख़ैरात करने से कहीं अफ़ज़ल और बढ़कर है।
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