कुरान - 17:19 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
وَمَنۡ أَرَادَ ٱلۡأٓخِرَةَ وَسَعَىٰ لَهَا سَعۡيَهَا وَهُوَ مُؤۡمِنٞ فَأُوْلَـٰٓئِكَ كَانَ سَعۡيُهُم مَّشۡكُورٗا

Transliteration: (Wa man araadal Aakhirata wa sa'aa lahaa sa'yahaa wa huwa mu'minun fa ulaaa'ika kaana sa'yuhum mashkooraa)

और जो आख़िरत चाहता है [50] और उसके लिए ऐसी कोशिश करता है जैसी कोशिश करनी चाहिए और वह ईमान वाला हो [51], तो उन्हीं की कोशिश मक़बूल (क़द्र की जाने वाली) है [52]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह बनी इस्राईल – आयत 19 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और जो आख़िरत चाहता है [50] और उसके लिए ऐसी कोशिश करता है जैसी कोशिश करनी चाहिए और वह ईमान वाला हो [51], तो उन्हीं की कोशिश मक़बूल है [52]।"

[50] सिर्फ़ ज़बानी तमन्ना काफ़ी नहीं

इस क़ैद से हमें मालूम हुआ कि आख़िरत और जन्नत पाने के लिए सिर्फ़ ज़बानी ख़्वाहिश और तमन्ना काफ़ी नहीं है। उसे हासिल करने के लिए दुरुस्त अक़ाइद और अल्लाह व उसके महबूब रसूल ﷺ की मुकम्मल फ़रमाँबरदारी के ज़रिए सच्ची मेहनत और तैयारी करना लाज़िम है।

[51] ईमान आमाल की क़ुबूलियत की बुनियाद है

इससे साबित हुआ कि ईमान के बिना कोई भी नेक अमल क़ुबूल नहीं होता।

नेक आमाल के लिए ईमान वैसा ही ज़रूरी है जैसे नमाज़ के लिए वुज़ू, या जैसे ज़हर से पाक सेहतबख़्श ग़िज़ा।

ईमान दरख़्त की जड़ है और नेक आमाल उसकी शाख़ें हैं।

[52] नेक आमाल क़ुबूल होने की तीन शर्तें

इस आयत से मालूम हुआ कि नेक आमाल की क़ुबूलियत के लिए तीन शर्तें लाज़मी हैं:

  1. सच्चा ईमान (दुरुस्त अक़ीदा),

  2. नेक नीयत (यानी रियाकारी से पाक होकर ख़ालिस आख़िरत की तलब), और

  3. सुन्नत के मुताबिक़ सही अमल व कोशिश।

इन तीन शर्तों के बिना हर ख़्वाहिश और मेहनत बिल्कुल बेकार है (ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)।

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