कुरान - 17:17 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
وَكَمۡ أَهۡلَكۡنَا مِنَ ٱلۡقُرُونِ مِنۢ بَعۡدِ نُوحٖۗ وَكَفَىٰ بِرَبِّكَ بِذُنُوبِ عِبَادِهِۦ خَبِيرَۢا بَصِيرٗا

Transliteration: (Wa kam ahlaknaa minal qurooni min ba'di Nooh; wa kafaa bi Rabbika bizunoobi 'ibaadihee Khabeeram Baseeraa)

और हमने नूह के बाद कितनी ही क़ौमों (संगतों) को हलाक फ़रमा दिया [46]! और आपका रब अपने बन्दों के गुनाहों से ख़बर रखने वाला, देखने वाला काफ़ी है [47]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह बनी इस्राईल – आयत 17 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और हमने नूह के बाद कितनी ही क़ौमों को हलाक फ़रमा दिया [46]! और आपका रब अपने बन्दों के गुनाहों से ख़बर रखने वाला, देखने वाला काफ़ी है [47]।"

[46] पिछली क़ौमों की हलाकत अहले-मक्का के लिए चेतावनी

हज़रत नूह अलैहिस्सलाम के बाद क़ौम-ए-आद, समूद और क़ौम-ए-लूत जैसी कितनी ही ताक़तवर क़ौमों को हलाक कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने अपने नबियों की मुख़ालिफ़त और नाफ़रमानी की थी।

चुनाँचे मक्का वालों को इससे सबक़ और इबरत हासिल करनी चाहिए — पिछलों की तबाही मौजूदा लोगों को बेदार करने के लिए काफ़ी होनी चाहिए।

[47] अल्लाह तआला का कामिल इल्म और फ़रिश्तों की लिखाई

अल्लाह तआला का फ़रिश्तों से आमालनामा लिखवाना और गवाह मुक़र्रर फ़रमाना अपने इल्म के लिए नहीं है (क्योंकि वह ख़ुद हर चीज़ को जानने और देखने के लिए काफ़ी है), बल्कि यह सब मुजरिमों पर हुज्जत तमाम करने के लिए है।

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