कुरान - 17:16 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
وَإِذَآ أَرَدۡنَآ أَن نُّهۡلِكَ قَرۡيَةً أَمَرۡنَا مُتۡرَفِيهَا فَفَسَقُواْ فِيهَا فَحَقَّ عَلَيۡهَا ٱلۡقَوۡلُ فَدَمَّرۡنَٰهَا تَدۡمِيرٗا

Transliteration: (Wa izaaa aradnaaa an nuhlika qaryatan amarnaa mutrafeehaa fafasaqoo feehaa fahaqqa 'alaihal qawlu fadammarnaahaa tadmeeraa)

और जब हम किसी बस्ती को हलाक करने का इरादा फ़रमाते हैं [43], तो हम उसके ख़ुशहाल (मालदार सरदारों) को हुक्म देते हैं [44], तो वे उसमें नाफ़रमानी करने लगते हैं, तो उन पर बात (अज़ाब का फ़ैसला) साबित हो जाती है, फिर हम उसे पूरी तरह उधेड़ कर तबाह कर देते हैं [45]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह बनी इस्राईल – आयत 16 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और जब हम किसी बस्ती को हलाक करने का इरादा फ़रमाते हैं [43], तो हम उसके ख़ुशहाल लोगों को हुक्म देते हैं [44], तो वे उसमें नाफ़रमानी करने लगते हैं, तो उन पर बात साबित हो जाती है, फिर हम उसे पूरी तरह उधेड़ कर तबाह कर देते हैं [45]।"

[43] मालदारों और सरदारों पर अहकाम की ज़िम्मेदारी

यहाँ हुक्म देने से मुराद या तो वे मख़्सूस शरई अहकाम हैं जो ग़रीबों पर नहीं बल्कि सिर्फ़ मालदारों पर फ़र्ज़ होते हैं — जैसे ज़कात और वाजिब सदक़ात; या फिर नमाज़ व रोज़े जैसे आम अहकाम हैं जिनका ख़ास तौर पर मालदारों और सरदारों से मुतालबा किया गया है।

मालदारों का ख़ास ज़िक्र इसलिए फ़रमाया गया क्योंकि ग़रीब और आम लोग उन्हीं के मातहत और पैरवी करने वाले होते हैं — अगर क़ौम के सरदार और अमीर लोग दीन के अहकाम बजा लाएँगे, तो ग़रीब भी उनकी देखा-देखी नेकी की राह पर चलेंगे।

[44] ख़ुशहाल तबक़े की बद-अमली से पूरे मुआशरे की तबाही

जब बस्ती के मालदार और बा-असर लोग अल्लाह के अहकाम ठुकराकर फ़िस्क़ व फ़ुजूर में पड़ जाते हैं, तो उनके असर से मातहत लोग भी गुनहगार और बदकार बन जाते हैं। लिहाज़ा इस आयत पर कोई एतिराज़ वारिद नहीं होता।

[45] क़ौम के रहनुमाओं और सरदारों की दोहरी ज़िम्मेदारी

इससे हमें यह सबक़ मिलता है कि क़ौम के सरदारों, अमीरों और रहनुमाओं को अपने आमाल में ज़्यादा एहतिहात और ख़ौफ़-ए-ख़ुदा रखना चाहिए, क्योंकि आम लोग उनसे जुड़े होते हैं और उन्हीं के नक़्श-ए-क़दम पर चलते हैं।

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