कुरान - 17:18 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
مَّن كَانَ يُرِيدُ ٱلۡعَاجِلَةَ عَجَّلۡنَا لَهُۥ فِيهَا مَا نَشَآءُ لِمَن نُّرِيدُ ثُمَّ جَعَلۡنَا لَهُۥ جَهَنَّمَ يَصۡلَىٰهَا مَذۡمُومٗا مَّدۡحُورٗا

Transliteration: (Man kaana yureedul 'aajilata 'ajjalnaa lahoo feehaa maa nashaaa'u liman nureedu summa ja'alnaa lahoo Jahannama yaslaahaa mazmoomammad hooraa)

जो कोई यह जल्द मिलने वाली दुनिया चाहता है [48], तो हम उसमें से जिसे चाहते हैं जितना चाहते हैं जल्द दे देते हैं [49]; फिर हमने उसके लिए जहन्नम ठहरा रखी है जिसमें वह बदहाल, धुतकारा हुआ दाख़िल होगा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह बनी इस्राईल – आयत 18 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"जो कोई यह जल्द मिलने वाली दुनिया चाहता है [48], तो हम उसमें से जिसे चाहते हैं जितना चाहते हैं जल्द दे देते हैं [49]; फिर हमने उसके लिए जहन्नम ठहरा रखी है जिसमें वह बदहाल, धुतकारा हुआ दाख़िल होगा।"

[48] दुनिया की वह तलब जो तबाही बनती है

दुनिया की तलब उस वक़्त बुरी और तबाहकुन है जब वह इन्सान को अपने ख़ालिक़ से ग़ाफ़िल कर दे, या जब इन्सान हलाल और हराम की तमीज़ छोड़ दे, या जब वह दुनिया को ही सब कुछ समझकर आख़िरत का इनकार कर बैठे, या जब वह दीन को दुनिया कमाने का ज़रिया बना ले।

यह हाल काफ़िरों, फ़ासिक़ों और मुनाफ़िक़ों का होता है।

[49] महदूद दुनियावी हिस्सा और हमेशा का ख़सारा

इसका मतलब यह है कि दुनिया की तलब करने पर भी तुम्हें सिर्फ़ उतना ही दुनियावी माल मिलेगा जितना तुम्हारे मुक़द्दर में लिख दिया गया है, चाहे तुम कितनी ही तदबीरें कर लो।

इसलिए अक़्लमंद इन्सान को महज़ फ़ानी दुनिया की ख़ातिर अपनी हमेशा रहने वाली आख़िरत बर्बाद नहीं करनी चाहिए।

मोमिन दुनिया में रहता तो है, मगर दुनिया को अपने दिल में नहीं आने देता — जैसे कश्ती पानी के ऊपर तैरती है तो सलामत रहती है, लेकिन अगर पानी कश्ती के अन्दर भर जाए तो कश्ती डूब जाती है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now