Transliteration: (Man kaana yureedul 'aajilata 'ajjalnaa lahoo feehaa maa nashaaa'u liman nureedu summa ja'alnaa lahoo Jahannama yaslaahaa mazmoomammad hooraa)
"जो कोई यह जल्द मिलने वाली दुनिया चाहता है [48], तो हम उसमें से जिसे चाहते हैं जितना चाहते हैं जल्द दे देते हैं [49]; फिर हमने उसके लिए जहन्नम ठहरा रखी है जिसमें वह बदहाल, धुतकारा हुआ दाख़िल होगा।"
दुनिया की तलब उस वक़्त बुरी और तबाहकुन है जब वह इन्सान को अपने ख़ालिक़ से ग़ाफ़िल कर दे, या जब इन्सान हलाल और हराम की तमीज़ छोड़ दे, या जब वह दुनिया को ही सब कुछ समझकर आख़िरत का इनकार कर बैठे, या जब वह दीन को दुनिया कमाने का ज़रिया बना ले।
यह हाल काफ़िरों, फ़ासिक़ों और मुनाफ़िक़ों का होता है।
इसका मतलब यह है कि दुनिया की तलब करने पर भी तुम्हें सिर्फ़ उतना ही दुनियावी माल मिलेगा जितना तुम्हारे मुक़द्दर में लिख दिया गया है, चाहे तुम कितनी ही तदबीरें कर लो।
इसलिए अक़्लमंद इन्सान को महज़ फ़ानी दुनिया की ख़ातिर अपनी हमेशा रहने वाली आख़िरत बर्बाद नहीं करनी चाहिए।
मोमिन दुनिया में रहता तो है, मगर दुनिया को अपने दिल में नहीं आने देता — जैसे कश्ती पानी के ऊपर तैरती है तो सलामत रहती है, लेकिन अगर पानी कश्ती के अन्दर भर जाए तो कश्ती डूब जाती है।
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