कुरान - 17:14 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
ٱقۡرَأۡ كِتَٰبَكَ كَفَىٰ بِنَفۡسِكَ ٱلۡيَوۡمَ عَلَيۡكَ حَسِيبٗا

Transliteration: (Iqra kitaabaka kafaa bi nafsikal Yawma 'alaika haseebaa)

(उससे कहा जाएगा) अपनी किताब पढ़ [38]! आज तू ख़ुद ही अपना हिसाब करने को काफ़ी है [39]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह बनी इस्राईल – आयत 14 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"(उससे कहा जाएगा) अपनी किताब पढ़ [38]! आज तू ख़ुद ही अपना हिसाब करने को काफ़ी है [39]।"

[38] क़यामत के दिन हर एक का पढ़ना और अरबी ज़बान

इससे हमें मालूम होता है कि क़यामत के दिन कोई भी अनपढ़ नहीं रहेगा, और वहाँ हर शख़्स अरबी ज़बान बोलेगा और समझेगा, क्योंकि "अपनी किताब पढ़" का यह हुक्म हर एक को दिया जाएगा — चाहे वह दुनिया में पढ़ा-लिखा था या अनपढ़, और दुनिया में उसकी कोई भी ज़बान रही हो।

[39] अपने आमाल का ख़ुद मुहासिब होना

जो शख़्स इस दुनिया में अपने आमाल का मुहासबा (हिसाब) करता रहता है, उसके लिए आख़िरत में अपने हिसाब का सामना करना निहायत आसान हो जाएगा, इंशाअल्लाह तआला!

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