Transliteration: (Iqra kitaabaka kafaa bi nafsikal Yawma 'alaika haseebaa)
"(उससे कहा जाएगा) अपनी किताब पढ़ [38]! आज तू ख़ुद ही अपना हिसाब करने को काफ़ी है [39]।"
इससे हमें मालूम होता है कि क़यामत के दिन कोई भी अनपढ़ नहीं रहेगा, और वहाँ हर शख़्स अरबी ज़बान बोलेगा और समझेगा, क्योंकि "अपनी किताब पढ़" का यह हुक्म हर एक को दिया जाएगा — चाहे वह दुनिया में पढ़ा-लिखा था या अनपढ़, और दुनिया में उसकी कोई भी ज़बान रही हो।
जो शख़्स इस दुनिया में अपने आमाल का मुहासबा (हिसाब) करता रहता है, उसके लिए आख़िरत में अपने हिसाब का सामना करना निहायत आसान हो जाएगा, इंशाअल्लाह तआला!
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