Transliteration: (Wa kulla insaanin alzamnaahu taaa'irahoo fee 'unuqihee wa nukhriji lahoo Yawmal Qiyaamati kitaabany yalqaahu manshooraa)
"और हमने हर इन्सान के गले में उसका नसीब बाँध दिया है [37], और क़यामत के दिन हम उसके लिए एक किताब निकालेंगे जिसे वह खुला हुआ पाएगा।"
हज़रत मुजाहिद (रहमतुल्लाहि अलैह) ने फ़रमाया कि अल्लाह तआला ने हर शख़्स की नेक-बख़्ती और बद-बख़्ती का हाल उसके गले में रख दिया है। इससे मालूम हुआ कि अल्लाह के नेक व मक़बूल बन्दे (औलिया व आरिलीन) हर एक के अंजाम और नसीब से बाख़बर होते हैं।
अगर क़िस्मत हर एक से छुपाए रखने की चीज़ होती, तो क्या उसे गले में (नुमायाँ जगह पर) लटकाया जाता?
हदीस शरीफ़ में वारिद है कि तक़दीर लिखने वाला फ़रिश्ता हर बच्चे की उम्र, नेक-बख़्ती, बद-बख़्ती, रिज़्क़ और उसकी ज़िन्दगी का हर पहलू उस वक़्त लिख लेता है जब वह अभी अपनी माँ के पेट में होता है।
चुनाँचे यह हदीस शरीफ़ इस आयत की तफ़सीर है। मज़ीद यह कि वह फ़रिश्ता हर शख़्स के तमाम अहवाल से पूरी तरह वाक़िफ़ होता है क्योंकि उसी ने वे सब लिखे हैं।
जब फ़रिश्तों को इतना वसीअ इल्म हासिल है, तो फिर हमारे आक़ा व मौला हुज़ूर अकरम ﷺ के इल्म-ए-मुबारक की वुसअत का क्या आलम होगा!
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