कुरान - 17:13 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
وَكُلَّ إِنسَٰنٍ أَلۡزَمۡنَٰهُ طَـٰٓئِرَهُۥ فِي عُنُقِهِۦۖ وَنُخۡرِجُ لَهُۥ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ كِتَٰبٗا يَلۡقَىٰهُ مَنشُورًا

Transliteration: (Wa kulla insaanin alzamnaahu taaa'irahoo fee 'unuqihee wa nukhriji lahoo Yawmal Qiyaamati kitaabany yalqaahu manshooraa)

और हमने हर इन्सान के गले में उसका नसीब (अमलनामा) बाँध दिया है [37], और क़यामत के दिन हम उसके लिए एक किताब (दफ़्तर) निकालेंगे जिसे वह खुला हुआ पाएगा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह बनी इस्राईल – आयत 13 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

"और हमने हर इन्सान के गले में उसका नसीब बाँध दिया है [37], और क़यामत के दिन हम उसके लिए एक किताब निकालेंगे जिसे वह खुला हुआ पाएगा।"

[37] हर इन्सान की क़िस्मत उसके गले के साथ वाबस्ता है

हज़रत मुजाहिद (रहमतुल्लाहि अलैह) ने फ़रमाया कि अल्लाह तआला ने हर शख़्स की नेक-बख़्ती और बद-बख़्ती का हाल उसके गले में रख दिया है। इससे मालूम हुआ कि अल्लाह के नेक व मक़बूल बन्दे (औलिया व आरिलीन) हर एक के अंजाम और नसीब से बाख़बर होते हैं।

अगर क़िस्मत हर एक से छुपाए रखने की चीज़ होती, तो क्या उसे गले में (नुमायाँ जगह पर) लटकाया जाता?

हदीस शरीफ़ में वारिद है कि तक़दीर लिखने वाला फ़रिश्ता हर बच्चे की उम्र, नेक-बख़्ती, बद-बख़्ती, रिज़्क़ और उसकी ज़िन्दगी का हर पहलू उस वक़्त लिख लेता है जब वह अभी अपनी माँ के पेट में होता है।

चुनाँचे यह हदीस शरीफ़ इस आयत की तफ़सीर है। मज़ीद यह कि वह फ़रिश्ता हर शख़्स के तमाम अहवाल से पूरी तरह वाक़िफ़ होता है क्योंकि उसी ने वे सब लिखे हैं।

जब फ़रिश्तों को इतना वसीअ इल्म हासिल है, तो फिर हमारे आक़ा व मौला हुज़ूर अकरम ﷺ के इल्म-ए-मुबारक की वुसअत का क्या आलम होगा!

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now