Transliteration: (Wakhfid lahumaa janaahaz zulli minar rahmati wa qur Rabbir hamhumaa kamaa rabbayaanee sagheera)
"और उनके लिए रहमत से आजिज़ी का बाज़ू झुका दे [61], और अर्ज़ कर, 'ऐ मेरे रब! उन दोनों पर रहम फ़रमा जैसा उन्होंने मुझे बचपन में पाला [62]।'"
इसका मतलब यह है कि तुम अमली तौर पर उनके साथ नेक बर्ताव करो, और उन पर माल ख़र्च करने में कभी कंजूसी या हिचकिचाहट न करो; क्योंकि जब तुम बचपन में बिल्कुल बेबस और लाचार थे, तब उन्होंने तुम्हारी परवरिश और देखभाल की थी।
लिहाज़ा अब जब वे बुढ़ापे में लाचार हो गए हैं, तो तुम पर लाज़िम है कि तुम उनकी पूरी देखभाल करो।
इससे यह अहम बात साबित होती है:
कोई भी इन्सान अपने माँ-बाप के एहसानात और हुक़ूक़ का बदला अपनी ताक़त से कभी पूरा अदा नहीं कर सकता।
इसीलिए अल्लाह की बारगाह में उनके हक़ में रहमत की दुआ करना कम से कम वह तोहफ़ा है जो हम उनकी उम्र भर की क़ुर्बानियों के बदले पेश कर सकते हैं।
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