कुरान - 17:37 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
وَلَا تَمۡشِ فِي ٱلۡأَرۡضِ مَرَحًاۖ إِنَّكَ لَن تَخۡرِقَ ٱلۡأَرۡضَ وَلَن تَبۡلُغَ ٱلۡجِبَالَ طُولٗا

Transliteration: (Wa laa tamshi fil ardi marahan innaka lan takhriqal arda wa lan tablughal jibaala toola)

और धरती पर अकड़कर (घमंड से) न चलो; निश्चय ही तुम न तो धरती को फाड़ सकते हो और न पहाड़ों की ऊंचाई तक पहुंच सकते हो! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-इस्रा – आयत 37 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] तकब्बुर और घमंडी चाल की निंदा

इंसान को उसकी औक़ात याद दिलाई गई कि चाहे कितनी भी अकड़ दिखा लो, न ज़मीन तुम्हारे पैरों से फटेगी और न तुम पहाड़ों जितने ऊंचे बन सकते हो। मोमिन की शान उसकी विनम्रता (आजिज़ी) और सादगी में है।

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