कुरान - 17:53 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
وَقُل لِّعِبَادِي يَقُولُواْ ٱلَّتِي هِيَ أَحۡسَنُۚ إِنَّ ٱلشَّيۡطَٰنَ يَنزَغُ بَيۡنَهُمۡۚ إِنَّ ٱلشَّيۡطَٰنَ كَانَ لِلۡإِنسَٰنِ عَدُوّٗا مُّبِينٗا

Transliteration: (Yawma yad'ookum fatastajeeboona bihamdihee wa tazunnoona il labistum illaa qaleela (section 5))

और मेरे बंदों से कह दीजिए कि वे ऐसी बात कहें जो सबसे उत्तम (शालीन व शिष्ट) हो; निश्चय ही शैतान उनके बीच झगड़ा (फ़साद) डलवाता है; वास्तव में शैतान मनुष्य का खुला शत्रु है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-इस्रा – आयत 53 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] सर्वोत्तम वाणी और शैतानी उकसावे से बचाव

मोमिनों को ताकीद की गई कि आपस में और विरोधियों से बात करते समय हमेशा मधुर, शालीन और उत्कृष्ट शब्दों का चयन करें। ज़रा-सी कड़वी बात या ताने का फ़ायदा उठाकर शैतान दिलों में रंजिश और फ़साद पैदा कर देता है।

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