कुरान - 17:56 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
قُلِ ٱدۡعُواْ ٱلَّذِينَ زَعَمۡتُم مِّن دُونِهِۦ فَلَا يَمۡلِكُونَ كَشۡفَ ٱلضُّرِّ عَنكُمۡ وَلَا تَحۡوِيلًا

Transliteration: (Qulid 'ul lazeena za'amtum min doonihee falaa yamlikoona kashfad durri'ankum wa laa tahweelaa)

कह दीजिए, "पुकारो उन्हें जिन्हें तुम उसके सिवा (पूज्य) समझते हो; वे न तो तुमसे किसी तकलीफ़ को दूर करने का अधिकार रखते हैं और न उसे बदलने का!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-इस्रा – आयत 56 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] ग़ैर-अल्लाह की शक्तिहीनता

फ़रिश्ते, जिन्नात, देवी-देवता या नेक बुज़ुर्ग किसी की मुसीबत को न टाल सकते हैं और न किसी की तक़दीर बदल सकते हैं। संकटमोचक केवल अल्लाह है।

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