कुरान - 17:67 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

67
وَإِذَا مَسَّكُمُ ٱلضُّرُّ فِي ٱلۡبَحۡرِ ضَلَّ مَن تَدۡعُونَ إِلَّآ إِيَّاهُۖ فَلَمَّا نَجَّىٰكُمۡ إِلَى ٱلۡبَرِّ أَعۡرَضۡتُمۡۚ وَكَانَ ٱلۡإِنسَٰنُ كَفُورًا

Transliteration: (Wa izaa massakumuddurru fil bahri dalla man tad'oona illaaa iyyaahu falammaa najjaakum ilal barri a'radtum; wa kaanal insaanu kafooraa)

और जब समन्दर में तुम्हें कोई मुसीबत छू जाती है, तो उसके (अल्लाह के) सिवा वे सब ग़ायब हो जाते हैं जिन्हें तुम पुकारा करते थे; फिर जब वह तुम्हें बचाकर खुश्की की तरफ़ ले आता है, तो तुम मुंह फेर लेते हो; और इंसान बड़ा ही नाशुकरा है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 67 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 67

✅ इंसान की बेवफ़ाई और मुश्किल में सिर्फ़ अल्लाह को पुकारना

जब इंसान समन्दर में तूफ़ानी लहरों और मौत के ख़तरे में घिर जाता है, तो उसके तमाम झूठे माबूद और सहारे फ़ना हो जाते हैं और वह ख़ालिस दिल से सिर्फ़ एक अल्लाह को पुकारता है। लेकिन जैसे ही अल्लाह उसे बचाकर साहिल पर सलामत पहुंचा देता है, वह दोबारा अल्लाह से मुंह मोड़कर शिर्क व नाफ़रमानी में मुब्तला हो जाता है। यह इंसान की इन्तेहाई नाशुक्रगुज़ारी है।

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