कुरान - 17:68 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

68
أَفَأَمِنتُمۡ أَن يَخۡسِفَ بِكُمۡ جَانِبَ ٱلۡبَرِّ أَوۡ يُرۡسِلَ عَلَيۡكُمۡ حَاصِبٗا ثُمَّ لَا تَجِدُواْ لَكُمۡ وَكِيلًا

Transliteration: (Afa amintum any yakhsifa bikum jaanibal barri aw yursila 'alaikum haasiban summa laa tajidoo lakum wakeelaa)

क्या तुम इस बात से बेख़ौफ़ हो गए हो कि वह तुम्हें खुश्की के किसी किनारे ज़मीन में धंसा दे, या तुम पर पत्थरों की आंधी भेज दे, फिर तुम अपने लिए कोई कारसाज़ (हिफ़ाज़त करने वाला) न पाओ? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 68 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 68

✅ अल्लाह के अज़ाब से कहीं भी पनाह नहीं

अल्लाह तआला ग़ाफ़िलों को झंझोड़ता है कि क्या तुम खुश्की पर पहुंचकर खुद को महफ़ूज़ समझ बैठे हो? जिस अल्लाह की कु़दरत समन्दर में है, वही अल्लाह ज़मीन पर भी हर चीज़ पर क़ादिर है। वह चाहे तो ज़मीन को फाड़कर तुम्हें धंसा दे या आसमान से पत्थरों की बारिश बरसा दे, और उस वक़्त कोई तुम्हारा मददगार नहीं होगा।

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