कुरान - 17:85 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

85
وَيَسۡـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلرُّوحِۖ قُلِ ٱلرُّوحُ مِنۡ أَمۡرِ رَبِّي وَمَآ أُوتِيتُم مِّنَ ٱلۡعِلۡمِ إِلَّا قَلِيلٗا

Transliteration: (Wa yas'aloonaka 'anirrooh; qulir roohu min amri rabbee wa maaa ooteetum minal 'ilmi illaa qaleelaa)

और वे आपसे रूह (आत्मा) के बारे में सवाल करते हैं; कह दीजिए कि 'रूह मेरे रब के हुक्म (अम्र) से है, और तुम्हें (इंसानों को) तो बहुत ही थोड़ा सा इल्म दिया गया है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 85 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 85

✅ रूह की हक़ीक़त और इंसानी इल्म की महदूदियत

यहूदियों के मशवरे पर मुशरिकीने मक्का ने नबी करीम (ﷺ) से रूह की हक़ीक़त के बारे में सवाल किया था। अल्लाह ने जवाब दिया कि रूह अल्लाह के अम्र और कु़दरत का एक अज़ीम राज़ है जिसकी हक़ीक़त तक इंसानी अक़्ल नहीं पहुंच सकती। इंसान के पास अल्लाह के बेपायां इल्म के मुक़ाबले में सिर्फ़ एक क़तरे के बराबर इल्म है।

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