Transliteration: (Wa yas'aloonaka 'anirrooh; qulir roohu min amri rabbee wa maaa ooteetum minal 'ilmi illaa qaleelaa)
यहूदियों के मशवरे पर मुशरिकीने मक्का ने नबी करीम (ﷺ) से रूह की हक़ीक़त के बारे में सवाल किया था। अल्लाह ने जवाब दिया कि रूह अल्लाह के अम्र और कु़दरत का एक अज़ीम राज़ है जिसकी हक़ीक़त तक इंसानी अक़्ल नहीं पहुंच सकती। इंसान के पास अल्लाह के बेपायां इल्म के मुक़ाबले में सिर्फ़ एक क़तरे के बराबर इल्म है।
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