Transliteration: (Wa izaaa an'amnaa 'alal insaani a'rada wa na-aa bijaani bihee wa izaa massahush sharru kaana ya'oosaa)
यह आयत इंसान की नफ़्सियाती कमज़ोरी को बयान करती है। जब अल्लाह उसे सेहत, दौलत और आराम देता है, तो वह अल्लाह से ग़ाफ़िल होकर तकब्बुर करने लगता है। लेकिन जैसे ही कोई मुसीबत या बीमारी आती है, तो वह अल्लाह की रहमत से मायूस होकर हिम्मत हार बैठता है, जबकि मोमिन हर हाल में शुक्र और सब्र का मुज़ाहिरा करता है।
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