कुरान - 17:83 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

83
وَإِذَآ أَنۡعَمۡنَا عَلَى ٱلۡإِنسَٰنِ أَعۡرَضَ وَنَـَٔا بِجَانِبِهِۦ وَإِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ كَانَ يَـُٔوسٗا

Transliteration: (Wa izaaa an'amnaa 'alal insaani a'rada wa na-aa bijaani bihee wa izaa massahush sharru kaana ya'oosaa)

और जब हम इंसान पर अपना इनाम फ़रमाते हैं, तो वह मुंह फेर लेता है और अकड़ कर पहलू बदल लेता है; और जब उसे कोई तकलीफ़ पहुंचती है, तो वह मायूस हो जाता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 83 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 83

✅ नाशुकरे इंसान की कमज़ोरी: ख़ुशहाली में घमंड और तंगी में मायूसी

यह आयत इंसान की नफ़्सियाती कमज़ोरी को बयान करती है। जब अल्लाह उसे सेहत, दौलत और आराम देता है, तो वह अल्लाह से ग़ाफ़िल होकर तकब्बुर करने लगता है। लेकिन जैसे ही कोई मुसीबत या बीमारी आती है, तो वह अल्लाह की रहमत से मायूस होकर हिम्मत हार बैठता है, जबकि मोमिन हर हाल में शुक्र और सब्र का मुज़ाहिरा करता है।

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