कुरान - 17:82 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

82
وَنُنَزِّلُ مِنَ ٱلۡقُرۡءَانِ مَا هُوَ شِفَآءٞ وَرَحۡمَةٞ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ وَلَا يَزِيدُ ٱلظَّـٰلِمِينَ إِلَّا خَسَارٗا

Transliteration: (Wa nunazzilu minal quraani maa huwa shifaaa'unw wa rahmatullil mu'mineena wa laa yazeeduz zaalimeena illaa khasaaraa)

और हम क़ुरआन में से ऐसी चीज़ें नाज़िल करते हैं जो ईमान वालों के लिए शिफ़ा और रहमत हैं, और ज़ालिमों के लिए तो यह ख़सारे (नुक्सान) के सिवा किसी चीज़ को नहीं बढ़ाता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 82 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 82

✅ क़ुरआन मजीद: दिलों और जिस्मों की शिफ़ा और मुकम्मल रहमत

क़ुरआन मजीद मोमिनों के रूहानी अमराज़ (जैसे शिर्क, निफ़ाक़, शक, कीना) और जिस्मानी तकलीफ़ों के लिए मुकम्मल शिफ़ा और रहमत है। लेकिन जो ज़ालिम और मुनकिर इसके एहकाम का इनकार करते हैं, उनके कुफ़्र और सरकशी के बाइस यह उनके लिए और ज़्यादा ख़सारे और बर्बादी का बाइस बन जाता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now