कुरान - 17:81 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

81
وَقُلۡ جَآءَ ٱلۡحَقُّ وَزَهَقَ ٱلۡبَٰطِلُۚ إِنَّ ٱلۡبَٰطِلَ كَانَ زَهُوقٗا

Transliteration: (Wa qul jaaa'al haqqu wa zahaqal baatil; innal baatila kaana zahooqaa)

और एलान कर दीजिए कि 'हक़ आ गया और बातिल मिट गया; बेशक बातिल तो मिटने ही वाला है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 81 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 81

✅ हक़ की फ़तह और बातिल की नाबूदी का एलान

जब हक़ ज़ाहिर होता है, तो बातिल और शिर्क के पैर उखड़ जाते हैं। फ़तहे मक्का के रोज़ जब रसूलुल्लाह (ﷺ) हरमे काबा में दाख़िल हुए और 360 बुतों को गिरा रहे थे, तो आप (ﷺ) की ज़बान-ए-मुबारक पर यही मुबारक आयत जारी थी: 'जाअल हक़्क़ु व ज़हक़ल बातिल, इन्नल बातिला काना ज़हूक़ा'।

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