कुरान - 18:101 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

101
ٱلَّذِينَ كَانَتۡ أَعۡيُنُهُمۡ فِي غِطَآءٍ عَن ذِكۡرِي وَكَانُواْ لَا يَسۡتَطِيعُونَ سَمۡعًا

Transliteration: (Allazeena kaanat a'yunuhum fee ghitaaa'in 'an zikree wa kaanoo laa yastatee'oona sam'aa (section 11))

जिनकी आंखें मेरी याद (नसीहत) से पर्दे में थीं और वे (हक़ बात) सुनने की ताक़त भी नहीं रखते थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 101 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 101

✅ हक़ से अंधे और बहरे मुनकिरीन

ये वे बदनसीब थे जिनकी दिलों की आंखें दुनिया में अल्लाह की वहदानियत और क़ुरआन को देखने से अंधी हो चुकी थीं और जो तकब्बुर के बाइस हक़ की आवाज़ सुनना भी गंवारा नहीं करते थे।

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