कुरान - 18:36 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
وَمَآ أَظُنُّ ٱلسَّاعَةَ قَآئِمَةٗ وَلَئِن رُّدِدتُّ إِلَىٰ رَبِّي لَأَجِدَنَّ خَيۡرٗا مِّنۡهَا مُنقَلَبٗا

Transliteration: (Wa maaa azunnus Saa'ata qaaa'imatanw wa la'ir rudittu ilaa Rabbee la ajidanna khairam minhaa munqalabaa)

'और न मैं समझता हूँ कि क़ियामत कभी आएगी; और अगर मुझे अपने रब की तरफ़ लौटाया भी गया, तो मैं ज़रूर वहाँ इससे भी बेहतर ठिकाना पाऊंगा।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 36

✅ क़ियामत का इनकार और बेबुनियाद ख़ुशफ़हमी

उसने न सिर्फ़ दुनिया पर घमंड किया बल्कि क़ियामत और हिसाब-किताब का भी मज़ाक़ उड़ाया। उसका गुमान था कि अगर कोई आख़िरत हुई भी, तो चूँकि दुनिया में मुझे इतना मिला है, इसलिए वहाँ भी मुझे इससे बेहतर ही मिलेगा। यह काफ़िरों की इन्तेहाई बेवकूफ़ी और ख़ुशफ़हमी है।

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