कुरान - 18:35 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
وَدَخَلَ جَنَّتَهُۥ وَهُوَ ظَالِمٞ لِّنَفۡسِهِۦ قَالَ مَآ أَظُنُّ أَن تَبِيدَ هَٰذِهِۦٓ أَبَدٗا

Transliteration: (Wa dakhala jannatahoo wa huwa zaalimul linafsihee qaala maaa azunnu an tabeeda haaziheee abadaa)

और वह अपने बाग़ में इस हाल में दाख़िल हुआ कि अपनी जान पर ज़ुल्म कर रहा था; उसने कहा, 'मैं नहीं समझता कि यह बाग़ कभी भी बर्बाद या फ़ना होगा;' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 35

✅ ग़फ़लत और दुनिया की अमरता का झूठा गुमान

वह अपने कुफ़्र और तकब्बुर के साथ बाग़ में दाख़िल हुआ और अपनी ज़ात पर ज़ुल्म किया। उसने समझा कि यह ऐश व आराम और सरसब्ज़ी हमेशा रहने वाली है और इसे कभी ज़वाल नहीं आ सकता।

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