कुरान - 18:33 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
كِلۡتَا ٱلۡجَنَّتَيۡنِ ءَاتَتۡ أُكُلَهَا وَلَمۡ تَظۡلِم مِّنۡهُ شَيۡـٔٗاۚ وَفَجَّرۡنَا خِلَٰلَهُمَا نَهَرٗا

Transliteration: (Kiltal jannataini aatat ukulahaa wa lam tazlim minhu shai'anw wa fajjarnaa khi laalahumaa naharaa)

दोनों बाग़ अपने-अपने फल भरपूर लाए और उनमें कोई कमी न छोड़ी, और हमने उन दोनों के बीच एक नहर जारी कर दी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 33

✅ भरपूर पैदावार और बहती हुई नहर

अल्लाह के फ़ज़्ल से उन दोनों बाग़ों में कभी कोई क़हत या नुक़्सान नहीं हुआ। फल पूरी तादाद में आते थे और सिंचाई के लिए बीच में मीठे पानी की नहर हमेशा जारी रहती थी। यह सब अल्लाह की अता और नेमत थी।

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