कुरान - 18:34 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَكَانَ لَهُۥ ثَمَرٞ فَقَالَ لِصَٰحِبِهِۦ وَهُوَ يُحَاوِرُهُۥٓ أَنَا۠ أَكۡثَرُ مِنكَ مَالٗا وَأَعَزُّ نَفَرٗا

Transliteration: (Wa kaana lahoo samarun faqaala lisaahibihee wa huwa yuhaawiruhoo ana aksaru minka maalanw wa a'azzu nafaraa)

और उसके पास बहुत-सी दौलत (फल व आमदनी) थी; तो उसने अपने साथी से बातचीत करते हुए कहा, 'मैं तुझसे माल व दौलत में भी ज़्यादा हूँ और नफ़री (ताक़त व कुन्बे) के एतबार से भी तुझसे ज़्यादा ज़ोरदार हूँ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 34

✅ दौलत का घमंड और ग़रीब मोमिन की तज़हीक

उस अमीर बाग़ वाले ने नेमतों पर अल्लाह का शुक्र अदा करने के बजाय तकब्बुर किया और अपने ग़रीब मोमिन साथी को हक़ीर जानकर डींगें मारने लगा कि मेरे पास तुझसे ज़्यादा दौलत, मुलाज़िम और ताक़तवर जत्था है।

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