कुरान - 18:45 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
وَٱضۡرِبۡ لَهُم مَّثَلَ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا كَمَآءٍ أَنزَلۡنَٰهُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ فَٱخۡتَلَطَ بِهِۦ نَبَاتُ ٱلۡأَرۡضِ فَأَصۡبَحَ هَشِيمٗا تَذۡرُوهُ ٱلرِّيَٰحُۗ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ مُّقۡتَدِرًا

Transliteration: (Wadrib lahum masalal hayaatid dunyaa kamaaa'in anzalnaahu minas samaaa'i fakhtalata bihee nabaatul ardi fa asbaha hasheeman tazroo hur riyaah; wa kaanal laahu 'alaa kulli shai'im muqtadiraa)

और उनके सामने दुनियावी ज़िन्दगी की मिसाल बयान कीजिए: जैसे वह पानी जिसे हमने आसमान से उतारा, तो उसके साथ ज़मीन की नबातात (घास-फूस) ख़ूब घनी होकर मिल गई, फिर वह सूखी घास (भूसा) बन गई जिसे हवाएं उड़ाए लिए फिरती हैं; और अल्लाह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 45

✅ दुनियावी ज़िन्दगी की हक़ीक़त: बारिश, हरियाली और भूसा

अल्लाह तआला ने दुनिया की फ़ानी ज़िन्दगी की एक हैरतअंगेज़ मिसाल दी: जैसे आसमान से बारिश बरसती है तो ज़मीन लहक उठती है, चारों तरफ़ हरियाली छा जाती है; लेकिन कुछ ही अरसे बाद वही सब्ज़ा सूखकर भूसा बन जाता है जिसे तेज़ हवाएं उड़ा ले जाती हैं। ठीक यही हाल इंसान की दुनियावी जवानी, हुस्न और दौलत का है।

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