कुरान - 18:47 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
وَيَوۡمَ نُسَيِّرُ ٱلۡجِبَالَ وَتَرَى ٱلۡأَرۡضَ بَارِزَةٗ وَحَشَرۡنَٰهُمۡ فَلَمۡ نُغَادِرۡ مِنۡهُمۡ أَحَدٗا

Transliteration: (Wa yawma nusaiyirul jibaala wa taral arda baariza tanw wa hasharnaahum falam nughaadir minhum ahadaa)

और उस दिन को याद करो जब हम पहाड़ों को चला देंगे (हटा देंगे) और आप ज़मीन को बिल्कुल खुली (सपाट) देखेंगे, और हम उन सबको इकट्ठा करेंगे फिर उनमें से किसी एक को भी नहीं छोड़ेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 47

✅ पहाड़ों का उड़ना और महशर का खुला मैदान

क़ियामत के रोज़ की हैबत का बयान है: मज़बूत और भारी पहाड़ रुई के गालों की तरह उड़ जाएंगे और ज़मीन बिल्कुल हमवार, सपाट और खुली हो जाएगी। हज़रत आदम से लेकर आख़िरी इंसान तक सबको ज़िन्दा करके महशर में जमा किया जाएगा, कोई एक नफ़्स भी छूट नहीं सकेगा।

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