कुरान - 18:51 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
۞مَّآ أَشۡهَدتُّهُمۡ خَلۡقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَلَا خَلۡقَ أَنفُسِهِمۡ وَمَا كُنتُ مُتَّخِذَ ٱلۡمُضِلِّينَ عَضُدٗا

Transliteration: (Maaa ash hattuhum khalqas samaawaati wal ardi wa laa khalqa anfusihim wa maa kuntu muttakhizal mudilleena 'adudaa)

मैंने उन्हें आसमानों और ज़मीन की पैदाइश के वक़्त मौजूद नहीं किया था और न खुद उनकी अपनी पैदाइश के वक़्त; और न मैं ऐसा हूँ कि गुमराह करने वालों को अपना मददगार बनाऊं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 51

✅ शैतान और मुशरिक माबूदों की बेबसी

अल्लाह फ़रमाता है कि जब मैंने कायनात को बनाया, तो क्या ये शैतान या बुत मेरी मदद के लिए मौजूद थे? वे तो खुद अपनी पैदाइश के वक़्त भी मौजूद न थे। अल्लाह बेनियाज़ है, उसे किसी गुमराह करने वाले साथी की ज़रूरत नहीं।

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