कुरान - 18:52 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
وَيَوۡمَ يَقُولُ نَادُواْ شُرَكَآءِيَ ٱلَّذِينَ زَعَمۡتُمۡ فَدَعَوۡهُمۡ فَلَمۡ يَسۡتَجِيبُواْ لَهُمۡ وَجَعَلۡنَا بَيۡنَهُم مَّوۡبِقٗا

Transliteration: (Wa Yawma yaqoolu naadoo shurakaaa'i yal lazeena za'amtum fada'awhum falam yastajeeboo lahum wa ja'alnaa bainahum maw biqaa)

और जिस दिन अल्लाह फ़रमाएगा, 'पुकारो मेरे उन शरीकों को जिनका तुम दावा करते थे!' तो वे उन्हें पुकारेंगे मगर वे उन्हें कोई जवाब नहीं देंगे, और हम उनके बीच एक हलाकत की खाई (मौबिक़) बना देंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 52

✅ मुशरिकों और उनके माबूदों की बेबसी

क़ियामत के दिन मुशरिकों से कहा जाएगा कि जिन पीरों, बुतों और झूठे माबूदों की तुम पूजा करते थे, उन्हें अपनी मदद के लिए पुकारो। वे लाख पुकारेंगे मगर कोई जवाब न मिलेगा। अल्लाह उनके दरमियान जहन्नम की ऐसी खौफ़नाक खाई डाल देगा जहाँ वे सब एक साथ हलाक होंगे।

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