कुरान - 18:53 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
وَرَءَا ٱلۡمُجۡرِمُونَ ٱلنَّارَ فَظَنُّوٓاْ أَنَّهُم مُّوَاقِعُوهَا وَلَمۡ يَجِدُواْ عَنۡهَا مَصۡرِفٗا

Transliteration: (Wa ra al mujrimoonan Naara fazannooo annahum muwaaqi'oohaa wa lam yajidoo 'anhaa masrifaa (section 7))

और मुजरिम लोग आग को देखेंगे तो यक़ीन कर लेंगे कि वे उसमें गिरने वाले हैं, और वे उससे बचने की कोई जगह न पाएंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 53

✅ जहन्नम को देखकर मुजरिमों का यक़ीन

जब मुजरिमों के सामने जहन्नम की दहकती हुई लपटें लाई जाएंगी, तो उन्हें पूरा यक़ीन हो जाएगा कि अब वे इस आग का ईंधन बनने वाले हैं, और उस वक़्त न कोई सिफ़ारिश होगी और न भागने का कोई रास्ता।

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