कुरान - 18:54 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَلَقَدۡ صَرَّفۡنَا فِي هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانِ لِلنَّاسِ مِن كُلِّ مَثَلٖۚ وَكَانَ ٱلۡإِنسَٰنُ أَكۡثَرَ شَيۡءٖ جَدَلٗا

Transliteration: (Wa laqad sarrafnaa fee haazal quraani linnaasi min kulli masal; wa kaanal insaanu aksara shai'in jadalaa)

और यक़ीनन हमने लोगों के लिए इस क़ुरआन में हर तरह की मिसालें तरह-तरह से बयान कर दी हैं; मगर इंसान हर चीज़ से बढ़कर झगड़ालू (बहस करने वाला) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 54

✅ क़ुरआन की रोशन दलीलें और इंसान की बहसबाज़ी

अल्लाह ने क़ुरआन में हक़ को समझाने के लिए हर अंदाज़ की नसीहतें और मिसालें पेश की हैं। लेकिन नाशुकरे इंसान की फ़ितरत में कज-बहसी और झगड़ालूपन ज़्यादा है, वह हक़ को सीधे-सादे क़ुबूल करने के बजाय बेजा एतराज़ात और तकरार में उलझा रहता है।

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