कुरान - 18:56 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
وَمَا نُرۡسِلُ ٱلۡمُرۡسَلِينَ إِلَّا مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَۚ وَيُجَٰدِلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِٱلۡبَٰطِلِ لِيُدۡحِضُواْ بِهِ ٱلۡحَقَّۖ وَٱتَّخَذُوٓاْ ءَايَٰتِي وَمَآ أُنذِرُواْ هُزُوٗا

Transliteration: (Wa maa nursilul mursaleena illaa mubashshireena wa munzireen; wa yujaadilul lazeena kafaroo bilbaatili liyudhidoo bihil haqqa wattakhazooo Aayaatee wa maaa unziroo huzuwaa)

और हम रसूलों को सिर्फ़ इसलिए भेजते हैं कि वे ख़ुशख़बरी सुनाने वाले और डराने वाले हों; और जो काफ़िर हैं वे बातिल के ज़रिये झगड़ा करते हैं ताकि उसके ज़रिये हक़ को झुठला दें, और उन्होंने मेरी आयतों को और जिस चीज़ से उन्हें डराया गया था मज़ाक़ बना लिया! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 56

✅ अंबिया का मन्सब और बातिल परस्तों की कज-बहसी

रसूलों की ज़िम्मेदारी मोमिनों को बशारत देना और गुनाहगारों को अज़ाब से डराना है। लेकिन काफ़िर झूठे हथकंडों और तर्कों से हक़ को दबाने की कोशिश करते हैं और अल्लाह की आयतों और अज़ाब की चेतावनियों का मज़ाक़ उड़ाते हैं।

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