कुरान - 18:57 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
وَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِۦ فَأَعۡرَضَ عَنۡهَا وَنَسِيَ مَا قَدَّمَتۡ يَدَاهُۚ إِنَّا جَعَلۡنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمۡ أَكِنَّةً أَن يَفۡقَهُوهُ وَفِيٓ ءَاذَانِهِمۡ وَقۡرٗاۖ وَإِن تَدۡعُهُمۡ إِلَى ٱلۡهُدَىٰ فَلَن يَهۡتَدُوٓاْ إِذًا أَبَدٗا

Transliteration: (Wa man azlamu mimman zukkira bi ayaati Rabbihee fa-a'rada 'anhaa wa nasiya maa qaddamat yadaah; innaa ja'alnaa 'alaa quloobihim akinnatan any yafqahoohu wa feee aazaanihim waqraa; wa in tad'uhum ilal hudaa falany yahtadooo izan abadaa)

और उस शख़्स से बड़ा ज़ालिम कौन होगा जिसे उसके रब की आयतों के ज़रिये नसीहत की जाए, फिर वह उनसे मुंह फेर ले और जो कुछ उसके हाथों ने पहले भेजा है उसे भूल जाए? बेशक हमने उनके दिलों पर पर्दे डाल दिए हैं कि वे इसे समझें और उनके कानों में बहरापन डाल दिया है; और अगर आप उन्हें हिदायत की तरफ़ बुलाएं, तो भी वे कभी सीधे रास्ते पर नहीं आएंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 57

✅ हक़ से एराज़ करने वालों के दिलों पर मुहर

जो शख़्स अल्लाह की आयतों की नसीहत सुनकर भी मुंह मोड़ लेता है और अपने गुनाहों से बाज़ नहीं आता, वह सबसे बड़ा ज़ालिम है। उसकी लगातार सरकशी की सज़ा के तौर पर अल्लाह उसके दिल पर ग़फ़लत का पर्दा और कानों में बहरापन डाल देता है जिससे वह हिदायत क़ुबूल करने की सलाहियत खो बैठता है।

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