कुरान - 18:59 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
وَتِلۡكَ ٱلۡقُرَىٰٓ أَهۡلَكۡنَٰهُمۡ لَمَّا ظَلَمُواْ وَجَعَلۡنَا لِمَهۡلِكِهِم مَّوۡعِدٗا

Transliteration: (Wa tilkal quraaa ahlak nahum lammaa zalamoo wa ja'alnaa limahlikihim maw'idaa (section 8))

और ये वे बस्तियाँ हैं जिन्हें हमने हलाक कर दिया जब उन्होंने ज़ुल्म किया, और हमने उनकी हलाकत के लिए भी एक मुक़र्रर वक़्त तय कर रखा था। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 59

✅ ज़ालिम क़ौमों की हलाकत से इब्रत

क़ौमे आद, समूद, लूत और फ़िरऔन की बस्तियाँ तारीख़ के पन्नों पर खुली इब्रत हैं। जब उन्होंने हक़ को ठुकराकर ज़ुल्म की इंतहा कर दी, तो अल्लाह ने अपने तयशुदा वक़्त पर उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया। यह मक्का वालों और क़ियामत तक के इंसानों के लिए सख़्त चेतावनी है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now