कुरान - 18:58 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَرَبُّكَ ٱلۡغَفُورُ ذُو ٱلرَّحۡمَةِۖ لَوۡ يُؤَاخِذُهُم بِمَا كَسَبُواْ لَعَجَّلَ لَهُمُ ٱلۡعَذَابَۚ بَل لَّهُم مَّوۡعِدٞ لَّن يَجِدُواْ مِن دُونِهِۦ مَوۡئِلٗا

Transliteration: (Wa Rabbukal Ghafooru zur rahmati law yu'aakhi zuhum bimaa kasaboo la 'ajjala lahumul 'azaab; bal lahum maw'idul lany yajidoo min doonihee maw'ilaa)

और आपका रब बड़ा बख़्शने वाला, बड़ी रहमत वाला है; अगर वह उनकी करतूतों पर उन्हें पकड़ने लगे तो उन पर जल्द ही अज़ाब भेज दे; बल्कि उनके लिए एक मुक़र्रर वक़्त है जिससे बचकर वे कोई पनाहगाह नहीं पाएंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 58

✅ अल्लाह की रहमत, मोहलत और मुक़र्रर वक़्त

अल्लाह तआला बेहद ग़फ़ूर और रहीम है। अगर वह गुनाहगारों को उनके गुनाहों की फ़ौरी सज़ा देता तो ज़मीन पर कोई ज़िन्दा न बचता। लेकिन अल्लाह अपनी हिकमत से मोहलत देता है ताकि लोग सुधर जाएं। जब वह तयशुदा मुक़र्रर वक़्त आ जाएगा, तो कोई अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकेगा।

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