कुरान - 18:60 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

60
وَإِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِفَتَىٰهُ لَآ أَبۡرَحُ حَتَّىٰٓ أَبۡلُغَ مَجۡمَعَ ٱلۡبَحۡرَيۡنِ أَوۡ أَمۡضِيَ حُقُبٗا

Transliteration: (Wa iz qaalaa Moosaa lifataahu laaa abrahu hattaaa ablugha majma'al bahrayni aw amdiya huqubaa)

और याद कीजिए जब मूसा ने अपने नौजवान (शागिर्द यूशा बिन नून) से कहा, 'मैं चलना नहीं छोड़ूंगा जब तक कि दो दरियाओं के संगम (मज्मअल बहरैन) पर न पहुंच जाऊं, चाहे मुझे ज़माने भर चलना पड़े।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 60

✅ हज़रत मूसा का सफ़र-ए-इल्म: दो दरियाओं का संगम

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने जब बनी इस्राईल में ख़ुत्बा दिया और किसी ने पूछा कि दुनिया में सबसे बड़ा आलिम कौन है, तो आपने फ़रमाया कि मैं हूँ (चूँकि उस वक़्त के रसूल थे)। अल्लाह ने वह्य फ़रमाई कि हमारे बन्दों में से एक बन्दा (हज़रत ख़िज़्र अलैहिस्सलाम) ऐसा है जिसके पास ऐसा मख़्सूस इल्म (इल्म-ए-लदुन्नी) है जो आपके पास नहीं। हज़रत मूसा ने अल्लाह से इजाज़त लेकर इल्म हासिल करने के लिए तवील सफ़र का अज़्म फ़रमाया।

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