कुरान - 18:61 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
فَلَمَّا بَلَغَا مَجۡمَعَ بَيۡنِهِمَا نَسِيَا حُوتَهُمَا فَٱتَّخَذَ سَبِيلَهُۥ فِي ٱلۡبَحۡرِ سَرَبٗا

Transliteration: (Falammaa balaghaa majma'a bainihimaa nasiyaa hootahumaa fattakhaza sabeelahoo fil bahri sarabaa)

फिर जब वे दोनों उन दो समन्दरों के मिलने की जगह पहुंचे, तो वे अपनी मछली को भूल गए, और उसने समन्दर में सुरंग की तरह अपना रास्ता बना लिया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 61

✅ भुनी हुई मछली का ज़िन्दा होना और रास्ता बनाना

अल्लाह ने हज़रत मूसा को निशानी दी थी कि अपने साथ एक भुनी हुई मछली टोकरी में रख लो, जहाँ वह मछली ज़िन्दा होकर पानी में चली जाएगी, वहीं उस नेक बन्दे (हज़रत ख़िज़्र) से मुलाक़ात होगी। जब वे 'मज्मअल बहरैन' की एक चट्टान के पास ठहरे, तो आबे हयात के असर से वह मछली ज़िन्दा होकर समन्दर में कूद गई और पानी उसके लिए एक मेहराब (सुरंग) की तरह जम गया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now