कुरान - 18:62 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

62
فَلَمَّا جَاوَزَا قَالَ لِفَتَىٰهُ ءَاتِنَا غَدَآءَنَا لَقَدۡ لَقِينَا مِن سَفَرِنَا هَٰذَا نَصَبٗا

Transliteration: (Falammaa jaawazaa qaala lifataahu aatinaa ghadaaa'anaa laqad laqeena min safarinaa haazaa nasabaa)

फिर जब वे दोनों आगे बढ़ गए, तो मूसा ने अपने नौजवान (साथी) से कहा, 'हमारा सुबह का खाना लाओ; यक़ीनन हमें अपने इस सफ़र में बड़ी थकान उठानी पड़ी है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 62 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 62

✅ सफ़र की थकान और खाने की तलब

वे उस चट्टान से आगे निकल गए। जब काफ़ी दूर चले गए तो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को भूख और थकान का अहसास हुआ, तो उन्होंने अपने साथी से खाना (वही मछली) निकालने को कहा।

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