कुरान - 18:64 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
قَالَ ذَٰلِكَ مَا كُنَّا نَبۡغِۚ فَٱرۡتَدَّا عَلَىٰٓ ءَاثَارِهِمَا قَصَصٗا

Transliteration: (Qaala zaalika maa kunnaa nabghi; fartaddaa 'alaa aasaari him maa qasasaa)

मूसा ने कहा, 'यही तो वह (जगह) थी जिसकी हमें तलाश थी!' चुनांचे वे दोनों अपने क़दमों के निशानों पर पीछे की तरफ़ लौट पड़े। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 64

✅ मंज़िल-ए-मक़सूद की पहचान और वापसी

हज़रत मूसा ने फ़रमाया कि वही तो हमारी मुलाक़ात की मुक़र्रर जगह थी। चुनांचे दोनों अपने क़दमों के निशानों को देखते हुए वापस उसी चट्टान पर पहुंचे।

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