कुरान - 18:65 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

65
فَوَجَدَا عَبۡدٗا مِّنۡ عِبَادِنَآ ءَاتَيۡنَٰهُ رَحۡمَةٗ مِّنۡ عِندِنَا وَعَلَّمۡنَٰهُ مِن لَّدُنَّا عِلۡمٗا

Transliteration: (Fa wajadaa 'abdam min 'ibaadinaaa aatainaahu Rahmatam min 'indinaa wa 'allamnaahu mil ladunnaa 'ilmaa)

फिर उन दोनों ने हमारे बन्दों में से एक बन्दे (हज़रत ख़िज़्र) को पाया जिसे हमने अपनी बारगाह से ख़ास रहमत अता की थी और उसे अपने पास से ख़ास इल्म (इल्मे लदुन्नी) सिखाया था। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 65 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 65

✅ हज़रत ख़िज़्र (अलैहिस्सलाम) से मुलाक़ात और इल्मे लदुन्नी

वहाँ उन्होंने अल्लाह के एक मुक़र्रब बन्दे हज़रत ख़िज़्र (अलैहिस्सलाम) को इबादत में मशग़ूल पाया। अल्लाह ने उन्हें अपनी ख़ास रहमत और तक़वीनी उमूर (क़ुदरती निज़ाम के पोशीदा राज़ों) का मख़्सूस इल्म (इल्मे लदुन्नी) अता फ़रमाया था जो आम इंसानों और शरीअत के ज़ाहिरी अहकाम से अलग था।

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